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Ode on an evanescent flower

In shades of pink and shades of white, As an armor of a plucky knight; At a certain point of day in time, Thou beauty of the summer, thou shine.
Three days for the life you wait, Three days to come off your adolescent age; Three days until that green bud sprouts, Three days until your Beauty you flout.
Awaiting a time long you once shine, At a morning that all, but you, whine; No sorrow no sign of meloncholy you show, Even though this life you live is miniscule of a blow.
Thine head held high with pride, Thine salute to the sun, big smile; Thine beauty above all at prime, Thou Beauty of summer, thou shine.
This is the pride that envies me above all, The pride in spite of a life so small; A day thou have, a day that's all, Then too you live life so gay, so tall.
With the cheer thou spread across horizons wide, With colours which as the sun, or even bright; The lesson you teach across generations wide, A life lived large is a well lived life.
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पुनर्जन्म-1

पहला ही पग रख जो देखा एक माता ने,
ना सह सकता है कोई जहाँ;
मौन थे देव सारे,
और धड अलग पडा था पुत्र का।

घुटनो पे बैठ उस माता ने चिल्लाया,
धड उठा अपनी गोध मेँ समाया;
अश्रु बह उन गालो से उतरे,
निरजीव बालक की क्षाति को भिगाया।

सीने से लगा कर रोयीं वो कुक्ष देर,
दुखी थे सारे देवगढ, और देव;
सर छुकाये थे खडे त्रिशूल-धारी भी,
इस त्रिशूल से ही भूल कर बैठे थे वे।

"किस्का है ये पाप यहाँ,
एक बालक पर करा पृहार किसने?
पुत्र मेरा है मृत पडा,
ये पाप घोर किया किस्ने?"

प्रचंड स्वरूप में आई वो देवी,
आक्रोष से थी आँखे लाल;
था क्रोध उनके उस सुंदर मुख पे,
था हाथों मे उस बालक का गुलाल।

थर थर कापी धरती उस दिन,
गगन भी भय से लगा कापने;
विराठ रूप देख उस देवी का,
आग्रह सारे देव लगे करने।

"आज कर दूंगी नाश इस सृष्टि का,
आज सूख जायेंगी नदियां और पेड;
आज कर दूंगी विनाश इन जीवो का,
कर इस आकाश को भेद।"

धरती पर लाल त्रिशूल रख,
हाथ जोड़ आऐ नीलकंठ समक्ष;
अश्रु उनके भी थे लगे बहने,
"आपका पापी है खड़ा प्रत्यक्ष।

इस बालक का हठ था कारण,
अड़ गया था द्वार पर;
समछाने पर भी समझता न था,
सज्य था युद्ध करने पर…

खून

इनखून मेंसाने हाथोकाकपकपानासुन, एक सकपकाएदिलनेआवाज़लगाईफिरसे, ‘क्यासाँसबाकीहैअभी? याएहसास हुआकोईग़लत फिर से?’
आँखोंसे पानीरिस्ता देख लगा, थोड़ी जान बाकी

Who is to blame?

Right across the frozen river they sat, Right below the hardy palm snow clad. They laughed and recollected the days gone by, The days they spent with this long gone lad.
Some riots of laugh they made, Some sighs on the issues they did hate, Those sighs though were less enough, As they together met after a very long decade.
Amidst those riots and sighs, They sat unaware of the incoming plight, With his wicked oar and rusted boat, The Charon approached near for his daily freight.
These days his job has been hard really, As rounds doubled for the valley, With souls of innocent and guilty-old and young, All alike to be taken along.
Along came a patrol of uniforms, Tired of the endless, sleepless nights, Tired of the bureaucracy above uptight, And tired of the hazy war.
The custodians of the law, Suspicious of the laughing lads, Suspicious of the way they sat, Loaded their service weapons.
In a few seconds next, The territory the custodians annexed. Neither were they happy, Nor were the wet snow covered bodies lying…

आज़ादी

आज से अच्छा तो वो बचपन ही था,
जब झींझक से आज़ाद थे|
कोई रोक ना कोई टोक थी बोलने पे,
कुछ भी पहेन्ने को आज़ाद थे|

आज जो एक ख़ौफ्फ सा लगता है,
अपने दिल का करने में|
इस ख़ौफ्फ से भरी ज़िंदगी से,
तब तो पूरा आज़ाद थे|

धर्म का कोई बंधन ना था,
ना था कोई डर भगवान से|
आज जो ख़ौफ्फ है पुजारियो से,
उस ख़ौफ्फ से बिल्कुल आज़ाद थे|

वो दोस्त जिसके डब्बे से खाते थे,
वो दोस्त जिसको दिन भर चिढ़ते थे,
आज जिसको धर्म पे बाटते हैं,
तब उसका पूरा नाम भी नही जानते थे|

ये बटवारा काइया किसने है?
ये दर्रार डाली किसने है?
पर आज जो दर्रार भरने को डरते हैं,
उस डर से तब सब आज़ाद थे|

मन का कहने से डर ना लगता था,
ना था डर खुल क सोचने में|
आज जिस सोच में भी झींझक है,
उस झींझक से पूरा आज़ाद थे|

उस सोचने से ही आता था समझ,
सही-ग़लत क बीच का भेद|
आज जो भेद भी धुंधला सा लगता है,
उस उलझन से तब आज़ाद थे|

इस झींझक, इस ख़ौफ़, इस घुटन से,
चाहिए आज तो आज़ादी हमें|
ना लौटा सको वो बचपन तो,
वो आज़ादी ही लौटा दो हमें|

A message for the next generation

Don’t you stumble upon the rocks that hurt us, Don’t you cry for the thorns that bled us, Don’t you long for stars that upset us, You, our little baby, you have all of us.
You have an aunt, from whom you’ll learn, The art of singing and the passion of hard work. You have an uncle, from whom you’ll earn, A crate of humor and a goodwill filled urn.
You have an uncle, who at turns will guide, At times you are stuck, or in a turmoil of life. And you have a useless uncle too, But at times hard and tough, he can be counted on by you.
But remember this our little baby, The strength of a woman, lies in her own body. Whenever in your life you start to forget this, Take a look around your house and look up to your Mommy.
From ways rosy, and some full of thorns, You will learn some life lessons. But don’t cry on the blood from those thorns you, Because lessons learnt bleeding are the most vital ones.
Trust people, but none too many, As goodwill is present, but not in plenty. Live life with zeal too large, That it sham…

बचपन

आज भी पापा की थैली में, कुछ खाने का पा जाते हैं, आज भी उनके जगाने के झूठ में, अक्सर फस जाते हैं|

आज भी कुछ गरजने की आवाज़ सुन, आँखें आसमान को देखती हैं,
आज भी ये आँखें कोई, हवाइज़हाज़ या हेलिकॉप्टर ढूंडती हैं|

आज भी सुबह उठने में, उतनी ही परेशानी होती है,
आज भी आधी नींद में, पूरी किताबें पलटती हैं|

आज भी मुसीबत में फोन, सबसे पहले दादा को ही जाता है,
और फिर उसके फोने के साथ, पूरा समाधान भी आता है|

आज भी गाने, वो पुराने ही अच्छे लगते हैं,
कभी रफ़ी, कभी किशोर, तो कभी मुकेश भी सुन लेते हैं|

पर आज क्यू अकेले, अंधेरे में रहते हैं,
दूसरो को सिर्फ़, हसते हुए रहते हैं?

आज क्यू आँसू सिर्फ़ आँख तक ही रह जाते हैं?
क्या अभी बचपन, सिर्फ़ भुलाने को कहते हैं?